बद्रीनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं व मान्यताएं

By | February 18, 2023

बाबा बद्रीनाथ की कहानी

बद्रीनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं : बद्रीनाथ मंदिर अथवा बद्रीनारायण मंदिर हिंदुओं का एक प्रसिद्ध मंदिर है । badrinath katha in hindi हिंदू धर्म के अनुसार चार प्रमुख मंदिर हैं । जिसमें से बद्रीनाथ मंदिर की एक अलग पहचान है ।  बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड राज्य के चमोली नामक जिले में गढ़वाल पहाड़ी ट्रैक पर‌ स्थित है । बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु का मंदिर है और दुनिया भर से तमाम हिंदू धर्म को मानने वाले लोग तथा वैष्णव भक्त भगवान विष्णु को आराध्य मानने वाले लोग हजारों की संख्या में प्रतिदिन इस मंदिर पर आते हैं । हिमालय की गोद में स्थित Badri Nath mandir के बारे में ऐसा माना जाता है कि दुनिया भर के सब तीर्थों पर जाने के बाद भी यदि कोई बद्रीनाथ मंदिर न पहुंचे तो उसकी धार्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है । बद्रीनाथ का पवित्र मंदिर यात्रा की दृष्टि से काफी दुर्गम इतिहास रखता है ।कुछ समय पहले तक यहां उचित मार्ग की व्यवस्था नहीं थी पर अब सरकार के प्रयास से अच्छी सड़कों के निर्माण से भगवान विष्णु के भक्तों को बद्रीनाथ मंदिर जाने के एक लिए सुलभता हो गई है ।बद्रीनाथ मंदिर से विभिन्न पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं । सनातन धर्म के कई ग्रंथों में भगवान विष्णु के इस प्राचीन मंदिर के बारे में लिखा गया है । बद्रीनाथ मंदिर से संबंधित कुछ धार्मिक कथाएं इस प्रकार हैं – 

1- भगवान विष्णु की तपस्या की कहानी क्या है badrinath katha in hindi

badrinath katha in hindi”: बद्रीनाथ के संबंध में भगवान विष्णु की एक कथा अत्यंत प्रचलित है । सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की मान्यता है कि बहुत समय पहले एक बार भगवान विष्णु प्रथ्वी पर साधना और ध्यान करने के लिए आए थे । पूरी प्रथ्वी को देखकर उन्होंने यही स्थान चुना जहां पर श्री बद्रीनाथ जी का मंदिर वर्तमान समय में है। बद्री नाथ के नाम में बद्री शब्द का अर्थ एक बेरी के पेड़ से है । ऐसी मान्यता है कि एक बार भगवान विष्णु और उनकी पत्नी मां लक्ष्मी की लड़ाई हो गई । आपस में लड़ाई करने के बाद मां लक्ष्मी भगवान विष्णु से नाराज़ होकर अपने मायके चली गई । इधर भगवान विष्णु अकेले हो गए तो उन्होंने इस स्थान पर साधना करने की योजना बनाई । कहते हैं तपस्या में लीन हुए भगवान विष्णु कई महीनों तक तपस्या करते रहे । कुछ दिनों बाद जब मां लक्ष्मी वापस आईं तो उन्होंने भगवान विष्णु की इस कठिन तपस्या को देखा यह देखकर मां लक्ष्मी बहुत परेशान हुई और उन्होंने इस स्थान पर बेरी के पेड़ का रूप धर दिया जिससे कि तपस्या करते भगवान विष्णु की धूप से रक्षा की जा सके । तभी से इस स्थान की पूजा की जाने लगी । इस स्थान पर केवल भगवान विष्णु ने ही तपस्या नहीं की अपितु उसके बाद अनेकों सिद्ध और प्रसिद्ध विद्वान और संत भगवान विष्णु के इस प्राचीन मंदिर पर अपनी चेतना से ऊपर उठने के लिए हजारों की संख्या में प्रतिदिन आते हैं , साधना करते हैं और तपस्या करते हैं ।

2- भगवान विष्णु और शिव की लीला की कहानी 

badrinath katha in hindi बद्रीनाथ मंदिर से संबंधित एक कथा अत्यंत लोकप्रिय है । ऐसी मान्यता है कि बहुत समय पहले बद्रीनाथ में जहां भगवान विष्णु का मंदिर हैं वहां भगवान शिव रहते थे । एक बार घूमते हुए जब भगवान विष्णु बद्रीनाथ कुछ तरफ आए तो उन्हें यह दृश्य बहुत सुंदर लगा । लेकिन यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती को भी अत्यंत प्रिय था । इसलिए मां पार्वती की झिझक के कारण भगवान शिव से भगवान विष्णु यह स्थान मांग नहीं सकते थे । इसलिए भगवान विष्णु ने एक लीला करने की सोची । वे एक बच्चे का रूप धरकर बद्रीनाथ में एक किनारे पर बैठकर जोर जोर से रोने लगे। उस सुनसान जगह में बच्चे को रोता देखकर मां पार्वती बाहर आईं उन्होंने बच्चे से शांत होने के लिए कहा । लेकिन बच्चे का रूप धरे भगवान विष्णु नहीं माने और वे रोते रहे । तभी बाहर भगवान शिव के । बच्चे को देखकर वे तुरंत पहचान गए कि वो बच्चा कोई साधारण नहीं बल्कि खुद नारायण का रूप हैं । भगवान शिव ने मां पार्वती से कुछ दूर के लिए घर से बाहर जाने के लिए कहा । मां पार्वती के बाहर जाते ही भगवान शिव ने बच्चे का रूप धरे भगवान विष्णु से बद्रीनाथ आने का कारण पूछा। तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव को अपना मंतव्य बताया कि ये बद्रीनाथ का स्थान उन्हें अत्यंत प्रिय है । भगवान शिव ने अपने आराध्य का निवेदन स्वीकार किया और वह बद्रीनाथ धाम छोड़कर कैलाश पर्वत पर चले गए । कहते हैं तभी से बद्रीनाथ का यह मंदिर भगवान विष्णु का निवास स्थान है और यहां हजारों की संख्या में लोग भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए आते । 

3- बद्रीनाथ से जुड़ी महाभारत की कहानी 

बद्रीनाथ का उल्लेख भारतीय सनातन परंपरा के बहुत सारे ग्रंथों में देखने को मिलता है । बद्रीनाथ से ही संबंधित एक कथा महाभारत में भी आती है जिसके अनुसार , जब पांडव अज्ञातवास पर थे तो वे इस स्थान पर कुछ दिनों के लिए रुके थे । पाण्डवों और द्रोपदी की स्वर्गोहिनी की कहानी इसी स्थान से संबंध रखती है । महाभारत कल की एक मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्री कृष्ण इसी स्थान पर अनेक संत विद्वानों के साथ तीर्थ यात्रा करने के लिए आए थे । कहां जाता है कि बद्रीनाथ धाम की यात्रा भगवान श्री कृष्ण की आखिरी तीर्थ यात्रा थी । 

4- आदिगुरु शंकराचार्य की कथा

जब भारत में विभिन्न संस्कृतियों का विकास होने लगा । विधर्मी लोग और उनकी आहट से हिंदू धर्म डगमगाने लगा उस समय ऐसी मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य जी ने हिंदू धर्म की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने के लिए और पूरे देश भारत और हिंदुओं को एक साथ बांधने के लिए बद्रीनाथ मंदिर की आधारशिला रखी थी ‌। आदिगुरु शंकराचार्य के इस मंदिर की आधारशिला रखने के संबंध में एक कथा स्कंद पुराण में आती है । स्कंद पुराण के अनुसार , आदि गुरु शंकराचार्य जी को भगवान विष्णु की एक मूर्ति प्राप्त हुई थी । आठवीं शताब्दी की इस मूर्ति को आदिगुरु शंकराचार्य जी ने मंदिर में स्थापित करके भगवान विष्णु का मंदिर का निर्माण कराया था। 

5- नर और नारायण की कथा 

बद्रीनाथ मंदिर के संबंध में एक प्रसिद्ध कथा नर और नारायण की आती है । भगवान नारायण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है । वामन पुराण के अनुसार जिस घाटी में बद्रीनाथ का मंदिर स्थित है उसी घाटी में भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में से एक नारायण जी ने भगवान शिव की तपस्या की थी । उनके कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव पृरकट हुए थे । घाटी के दूसरी ओर भगवान विष्णु का मंदिर यानि की बद्रीनाथ मंदिर स्थित है ।  

6- भगवान विष्णु की आराम स्थली है बद्रीनाथ

बद्रीनाथ के बारे में एक कथा है: बद्रीनाथ मन्दिर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है । जैसा कि हमने जाना कि बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और विष्णु भगवान के संबंध में कई पौराणिक ग्रंथों का मानना है कि वे साल के छः महीने अपने कार्य पर रहते हैं अर्थात सृष्टि के संचालन में संलग्न रहते हैं और छः महीने अपने परिवार के साथ आराम में बिताते हैं । ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ ही वह स्थान है जहां भगवान विष्णु छः महीने आराम करते हैं । कहते हैं कि केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद भगवान विष्णु के इस मंदिर के दर्शन के बाद मनुष्य के जीवन के सारे पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं । 

Frequently Ask Questions (FAQS)

1- बद्रीनाथ किसका अवतार हैं?

बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। विभिन्न धर्म और विद्वानों के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु का सबसे प्रिय स्थान है ।‌ 

2- बद्रीनाथ मंदिर की विशेषता क्या है ?

बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर यह है । यह दो पर्वतों के बीच स्थित है तथा सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के अनुसार भगवान विष्णु साल के छः महीने अपने कार्य पर रहते हैं अर्थात सृष्टि के संचालन में संलग्न रहते हैं और छः महीने अपने परिवार के साथ आराम में बिताते हैं । ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ ही वह स्थान है जहां भगवान विष्णु छः महीने आराम करते हैं। 

3- बद्रीनाथ मंदिर का महत्व क्या है ?

भगवान विष्णु के इस प्राचीन मंदिर का विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। कहां जाता है कि जब तक भगवान विष्णु के इस प्राचीन मंदिर के दर्शन न किए जाएं तब तक पूरी दुनिया भर के हर तीर्थ स्थान की यात्राएं भी अधूरी ही रहती हैं । भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर में हर तीर्थ स्थान की यात्रा करने के बाद बद्रीनाथ मंदिर में विभिन्न संत विद्वानों के साथ पहुंचे थे। कहते हैं कि केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद भगवान विष्णु के इस मंदिर के दर्शन के बाद मनुष्य के जीवन के सारे पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं । 

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