हनुमान चालीसा पढ़ने के 10 अद्भुत लाभ और महत्व Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi
हनुमान चालीसा के मुख्य लाभ
- डर और नकारात्मकता से मुक्ति: “भूत पिशाच निकट नहीं आवै” पंक्ति के अनुसार, इसका पाठ करने से हर प्रकार के भय, बुरे सपनों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
- आत्मविश्वास और साहस: हनुमान जी साहस के प्रतीक हैं। उनकी स्तुति करने से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
- संकटों का नाश: “संकट कटै मिटै सब पीरा” का अर्थ है कि इसके नियमित पाठ से जीवन के बड़े से बड़े दुख और शारीरिक कष्ट दूर हो सकते हैं।
- ग्रह दोषों से राहत: विशेष रूप से शनि की साढ़ेसाती या ढैया के दौरान हनुमान चालीसा पढ़ना लाभकारी होता है, क्योंकि शनि देव हनुमान जी के भक्तों को परेशान नहीं करते।
- बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति: “बल बुद्धि विद्या देहु मोहि” के माध्यम से भक्त बुद्धि और विवेक की प्रार्थना करते हैं, जिससे एकाग्रता और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
हनुमान चालीसा वैज्ञानिक और मानसिक दृष्टिकोण
- तनाव में कमी: चालीसा की लयबद्ध पंक्तियाँ एक मंत्र थेरेपी की तरह काम करती हैं, जो मस्तिष्क को शांत करती हैं और ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में मदद करती हैं।
- अनुशासन: नियमित रूप से (जैसे 40 दिनों तक) पाठ करने से जीवन में अनुशासन आता है और सकारात्मक आदतें विकसित होती हैं।
हनुमान चालीसा पढ़ने की सही विधि क्या है?
- स्नान: पाठ शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले या लाल रंग के) धारण करें।
- समय: सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) या शाम का समय है।
- आसन: बैठने के लिए कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें। जमीन पर सीधे न बैठें।
हनुमान चालीसा की पाठ की प्रक्रिया
- दिशा: अपना मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें।
- मूर्ति/चित्र: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक (घी या चमेली के तेल का) जलाएं।
- शुरुआत: पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी और अपने कुलदेवता का स्मरण करें।
- श्री राम का नाम: हनुमान जी “राम भक्त” हैं, इसलिए पाठ से पहले और बाद में “सियावर रामचंद्र की जय” या “जय श्री राम” का जाप अवश्य करें। [1, 2, 3]
- एकाग्रता: पाठ करते समय इधर-उधर की बातें न करें। पंक्तियों के अर्थ पर ध्यान दें।
- उच्चारण: शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध रखें। यदि जोर से बोलकर पढ़ना संभव न हो, तो मन में भी पाठ कर सकते हैं।
- निरंतरता: इसे एक निश्चित संख्या में पढ़ें (जैसे 1, 3, 7 या 11 बार)। संकल्प लेकर 40 दिनों तक पाठ करना सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। [1]
हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi
।। दोहा ।।
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार।।
।। चौपाई ।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।।
संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।
।। दोहा ।।
पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप।।
हनुमान जी को कौन सा भोग (प्रसाद) सबसे प्रिय है?
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- बूंदी और लड्डू: हनुमान जी को बूंदी और बेसन के लड्डू सबसे ज्यादा पसंद हैं। कई लोग संकट दूर करने के लिए मोतीचूर के लड्डू भी चढ़ाते हैं।
- चना और गुड़: यह सबसे सरल और प्रिय भोग माना जाता है। खासकर मंगलवार और शनिवार को बंदरों को चना और गुड़ खिलाना भी शुभ होता है।
- इमरती: हनुमान जी को लाल रंग और मीठा पसंद है, इसलिए इमरती का भोग भी बहुत प्रचलित है।
- मलीदा: शुद्ध घी, आटे और गुड़ से बना ‘मलीदा’ हनुमान जी को विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। [1, 2, 3, 4, 5]
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- तुलसी दल: हनुमान जी के किसी भी भोग में तुलसी का पत्ता रखना अनिवार्य है। इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते क्योंकि वे परम राम भक्त हैं।
- पान का बीड़ा: अपनी मनोकामना पूर्ति और संकटों से मुक्ति के लिए उन्हें मीठा पान (बीड़ा) चढ़ाना बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसमें चूना, तंबाकू या सुपारी नहीं होनी चाहिए।
- केसर भात: दक्षिण भारत में हनुमान जी को केसरिया चावल का भोग भी लगाया जाता है। [1, 2, 3, 4, 5]
- हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?
- मंगलवार के व्रत में नमक क्यों नहीं खाते?
- प्रसाद चढ़ाते समय कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
